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Energy efficiency project underway to save electricity in Bangladesh | बांग्लादेश में बिजली बचाने के लिए चल रही ऊर्जा दक्षता परियोजना



ढाका, 30 जुलाई (आईएएनएस)। बांग्लादेश के 22 उद्योगों में वर्ष 2030 तक समग्र ऊर्जा खपत में 20 प्रतिशत की कमी लाने के लिए ऊर्जा दक्षता परियोजना चल रही है, जिससे बिजली की कुल खपत में 43 प्रतिशत की कमी आने की उम्मीद है।

इन 22 उद्योगों में तीन सीमेंट कारखाने, नौ वस्त्र उद्योग, सात कताई मिलें, एक बुनाई की फैक्ट्री, एक पेपर मिल और एक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग शामिल हैं, जो अपने बिलों में सालाना 110 करोड़ टका की बचत करेंगे।

लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ऊर्जा एवं खनिज संसाधन राज्य मंत्री नसरुल हामिद ने ऊर्जा विशेषज्ञों से इसके कुशल उपयोग के लिए उपयुक्त तकनीक का पता लगाने की अपील की है।

उन्होंने कहा, यह लक्ष्य हासिल करना तब तक असंभव है, जब तक कि ऊर्जा दक्षता में एक सिद्ध एवं विशिष्ट रूप से निर्मित तकनीक नहीं होगी।

ऊर्जा विशेषज्ञों ने कहा कि अगर ऊर्जा-कुशल उपकरणों का उपयोग किया जाता है तो इसी मांग को 20 प्रतिशत कम ऊर्जा से पूरा किया जा सकता है।

सस्टेनेबल एंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट अथॉरिटी (एसआरईडीए) ने इस परियोजना को लागू करने के लिए उद्योगों के लिए दो सरकारी स्वामित्व वाले विशेष वित्तीय संस्थानों से लगभग 1,147 करोड़ टका के सॉफ्ट लोन की व्यवस्था की है।

परियोजना के तहत, इन्फ्रास्ट्रक्च र डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (आईडीसीओएल) 618.90 करोड़ टका और बांग्लादेश इन्फ्रास्ट्रक्च र फाइनेंस फंड लिमिटेड (बीआईएफएफएल) इन कंपनियों के लिए ऋण के तौर पर 528.90 करोड़ टका प्रदान करेंगी।

एसआरईडीए ऊर्जा कुशल उपकरणों का उपयोग करने के लिए उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करने के माध्यम से अपनी तरह की पहली परियोजना को लागू कर रहा है।

एसआरईडीए के अध्यक्ष और बिजली विभाग के अतिरिक्त सचिव मोहम्मद अलाउद्दीन ने कहा कि इन उद्योगों की प्रति वर्ष उत्सर्जन में कमी 80,357 टी-सीओ2 होगी।

उन्होंने कहा, हमें उम्मीद है कि इस परियोजना के लागू होने के बाद उद्योगों की औसत बिजली की खपत में लगभग 43 प्रतिशत की कमी आएगी।

एसआरईडीए के अधिकारियों ने कहा कि ये उद्योग ऊर्जा कुशल उपकरण स्थापित कर रहे हैं और इन्होंने पारंपरिक प्रकाश व्यवस्था को एलईडी बल्ब आधारित प्रणाली से बदल दिया है।

बांग्लादेश के अधिकांश उद्योग पारंपरिक उपकरणों का उपयोग करते हैं, जिनके लिए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय कुशल मानक की तुलना में अधिक बिजली का उपभोग करना पड़ता है।

अधिकारियों ने कहा, ऊर्जा की खपत में यह अक्षमता न केवल बिजली क्षेत्र के लिए खराब है, बल्कि ये उत्पादन लागत को भी बढ़ाती है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने 2030 तक ऊर्जा की खपत को 20 प्रतिशत तक कम करने के लिए ऊर्जा दक्षता में सुधार करने के लिए एक लक्ष्य निर्धारित किया है।



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