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Trump attacked China in United Nations General Assembly, but why? | संयुक्त राष्ट्र महासभा में ट्रंप ने चीन पर बोला हमला, लेकिन क्यों?



बीजिंग, 24 सितम्बर (आईएएनएस)। 75वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बहस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तमाम देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के नेताओं के सामने तथ्यों की अनदेखी कर कोविड-19 महामारी, इंटरनेट सुरक्षा और पारिस्थितिकी पर्यावरण आदि मुद्दों पर अकारण चीन पर आरोप लगाया और मनमाने ढ़ंग से राजनीतिक वायरस फैलाया।

संयुक्त राष्ट्र महासभा एक गंभीर मंच है, पर ट्रंप ने इस मंच के जरिए चीन के खिलाफ राजनीतिक हमला किया। सभी मौके पर चीन पर कालिख पोतने की कार्रवाई से न सिर्फ संयुक्त राष्ट्र संघ पर लांछन लगाया गया, बल्कि विश्व शांति भी भंग हुई।

तो ट्रंप ने क्यों इस मंच पर तथ्यों की अनदेखी कर झूठ बोला? सबसे बड़ा उद्देश्य आम चुनाव जीतने के लिए चीन पर जिम्मेदारी थोपना है। ट्रंप ने इसलिए कोरोना वायरस को फिर एक बार चीनी वायरस कहकर बुलाया, क्योंकि वे मतदाताओं में अपना समर्थन बढ़ाना चाहते हैं। ट्रंप के विचार में जितने बड़े मंच पर चीन पर लांछन लगाया जाएगा, अमेरिकी मतदाता उतना ही विश्वास करेंगे। वास्तव में ट्रंप संयुक्त राष्ट्र महासभा के जरिए नागरिकों को उत्तेजित करना चाहते हैं।

दरअसल, लंबे समय से अमेरिका दुनिया भर में चीन को नुकसान पहुंचाने वाली छवि बनाना चाहता है। इसलिए अमेरिका ने आरोप लगाया कि चीन को कोविड-19 महामारी की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है, चीन इंटरनेट हमला करता है, यहां तक कि चीन पारिस्थितिकी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। अमेरिका दुनिया को बताना चाहता है कि चीन अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरा है, चीन को रोकने पर ही सभी समस्याएं ठीक हो सकेंगी। वास्तव में अमेरिका के कथन का दुनिया विश्वास नहीं करती, लेकिन ट्रंप के विचार में जब तक बात करते करेंगे, देर-सबेर लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा।

इसके अलावा, अमेरिका विश्व मंच पर चीन पर दबाव डालने के लिए बहाना और वैधता ढूंढ़ना चाहता है। आने वाले समय में अमेरिका अवश्य ही लगातार पूरी तरह से चीन पर दबाव डालेगा, लेकिन इससे दुनिया में अमेरिका की प्रतिष्ठा कमजोर हो जाएगी। इसलिए चीन पर कालिख पोतने के जरिए अमेरिका अपने राजनीतिक हमले के लिए बहाना ढूंढ़ना चाहता है।

लेकिन इन बेहूदा दलीलों की अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने पहले से ही अपील की है। द लान्सेट, नेचर आदि प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक पत्रिकाओं ने बारांबार महामारी को राजनीतिक बनाने की कार्रवाई का ²ढ़ विरोध किया, लेकिन कुछ राजनीतिज्ञ अपने गिरेबान में नहीं झांकते। जब ट्रंप संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दे रहे थे, तब अमेरिका में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या 2 लाख से अधिक हो गई है। इस घड़ी में अमेरिकी सरकार नागरिकों की जान बचाने के बजाय लोगों का ध्यान चीन की ओर आकर्षित करना चाहती है। वास्तव में यह दुनिया के लोगों के साथ धोखा है।

तथ्य सबसे अच्छा सबूत है। महामारी को राजनीतिक बनाना लोगों की इच्छा के विरुद्ध है, राजनीतिक वायरस फैलाना अमेरिका में महामारी की स्थिति बेहतर नहीं बना सकती। महामारी पर जानकारी बढ़ने के चलते अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने सहमति बनाई है कि वायरस मानव जाति का समान दुश्मन है। एकजुट होकर सहयोग करने पर ही महामारी को पराजित कर सकेंगे। कुछ राजनीतिज्ञों की महामारी के जरिए राजनीतिक लाभ उठाने की कुचेष्टा विफल नहीं होगी।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

— आईएएनएस



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